अभूतपूर्व सफलता के साथ राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी सम्पन्न

September 23, 2017

विद्वान सेतु का काम करते हैं , युवा विद्वान भविष्य के कर्णधार : आचार्य वसुनन्दी जी महाराज

दिल्ली। परम पूज्य आचार्य श्री विद्यानंद जी महाराज के आशीर्वाद और परम पूज्य आचार्य श्री वसुनन्दी जी महाराज के ससंघ सान्निध्य में प्रभावना जन कल्याण परिषद (रजि.) के तत्वावधान में देश की राजधानी दिल्ली के यूसुफ सराय ग्रीन पार्क स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर में 23 से24 सितंबर 2017 तक राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी का सफलतम आयोजन किया गया।जिसमें आचार्य श्री वसुनन्दी जी महाराज के द्वारा लिखित प्राकृत- साहित्य पर विद्वानों द्वारा आलेख प्रस्तुत किये गए।
संगोष्ठी के संरक्षक डॉ शीतलचंद्र जैन जयपुर, निदेशक ब्र जय निशांत जैन टीकमगढ़, पं विनोद जैन रजवांस, संयोजक पं मनोज शास्त्री अहार वाले दिल्ली, सह संयोजक डॉ सोनल शास्त्री दिल्ली रहे।
दो दिवसीय संगोष्ठी का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार रहा-
23 सितंबर 2017- प्रातः विधिवत उदघाटन हुआ । अध्यक्षता डॉ शीतलचंद्र जी जयपुर ने की। संचालन पं मनोज शास्त्री ने किया। इस सत्र में ब्र जयकुमार निशांत भैया और डॉ पंकज जैन भोपाल ने अपने आलेख प्रस्तुत किये।
द्वितीय सत्र दोपहर 1.30 बजे पं विनोद जी रजवांस की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सारस्वत अतिथि पं पवन दीवान मुरैना रहे। संचालन डॉ आनन्द जैन वाराणसी ने किया।इस सत्र में पं राजेश शास्त्री ललितपुर, डॉ मुकेश जैन दिल्ली, आशीष शास्त्री (शोध छात्र bhu)वाराणसी, डॉ निर्मल जैन टीकमगढ़, अखिलेश शास्त्री डिकोली, डॉ शीतलचंद्र जी जयपुर, पं सुरेश मरौरा इन्दौर, डॉ जयकुमार उपाध्ये दिल्ली ने अपने आलेख प्रस्तुत किये।
तृतीय सन्ध्या कालीन सत्र 6.15बजे से डॉ अनेकांत जैन दिल्ली की अध्यक्षता में हुआ। संचालन डॉ सोनल शास्त्री दिल्ली ने किया।इस सत्र में पं विनोद जी रजवांस , डॉ सतेंद्र जैन दिल्ली ने अपने लेख प्रस्तुत किये।
चतुर्थ सत्र 24 सितंबर को प्रातः 8 बजे से ब्र. जय निशांत जी की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।संचालन डॉ. निर्मल शास्त्री टीकमगढ़ ने किया। इस सत्र में डॉ. सुनील संचय ललितपुर, डॉ. डी. सी. जैन (एम्स) दिल्ली, डॉ. अनेकांत जैन दिल्ली, पं संजीव शास्त्री ललितपुर, ब्र. प्रज्ञा दीदी ने अपने आलेख प्रस्तुत किये।
पंचम सत्र और समापन समारोह दोपहर 2 बजे से डॉ. पंकज जैन भोपाल की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। मंगलाचरण ब्र. राकेश भैया जी आगरा ने किया। संचालन डॉ. सुनील संचय ललितपुर ने किया। इस सत्र में प्राचार्य विनीत जैन शास्त्री साढूमल, डॉ. मधु दीदी जोधपुर, डॉ. ब्र. अनिल भैया प्राचार्य जयपुर, पं मुकेश शास्त्री ललितपुर, शिखरचंद शास्त्री दिल्ली, डॉ. सोनल शास्त्री दिल्ली ने अपने आलेख प्रस्तुत किये।
संगोष्ठी में ऐलक श्री विज्ञान सागर जी महाराज, आर्यिका श्री वर्धस्वनंदनी माताजी ने भी अपना मार्गदर्शन दिया।
इस अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री वसुनन्दी जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि विद्वान एक बीच की कड़ी हैं। जो साधु और श्रावक दोनों से जुड़ा है। विद्वान एक सेतु का काम करते हैं। जहाँ साधु नहीं पहुँच पाते वहॉं विद्वान अपनी ज्ञान की किरणों से पहुँचकर अज्ञान तिमिर को दूर करते हैं।युवा विद्वान भविष्य के कर्णधार हैं। ये युवा विद्वान युग को परिवर्तित करने की सामर्थ्य रखते हैं। मेरा विद्वानों के साथ-साथ उनके माता-पिता को भी बहुत-बहुत आशीर्वाद है।
इस अवसर पर उक्त विद्वानों के अलावा पं सनत जी रजवांस,पं पवन जी दीवान मुरैना, पं मनीष संजू टीकमगढ़, ब्र. संजय शास्त्री अहार, पं आलोक जैन दिल्ली, पं जिनेन्द्र शास्त्री मथुरा, पं आलोक शास्त्री मलहरा, पं विनय अहार, सतीश जैन आदि भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर यूसुफ सराय -ग्रीन पार्क जैन मंदिर के अध्यक्ष श्री आर.पी.जैन, महामंत्री श्री सतीश जैन, कोषाध्यक्ष श्री राजकुमार जैन और उनकी पूरी टीम ने सभी विद्वानों का शाल, श्रीफल, साहित्य, किट , स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया ।
संगोष्ठी की अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए आगामी समय में भी पूज्य आचार्य श्री वसुनन्दी जी महाराज के सान्निध्य में संगोष्ठी आयोजित की जाती रहेगीं।

श्रीफल न्यूज़

आज का सुविचार

” कुछ हँस के बोल दिया करो,
कुछ हँस के टाल दिया करो ।
यूँ तो बहुत परेशानियाँ हैं तुमको भी मुझको भी,
मगर कुछ फैसले वक्त पे डाल दिया करो ।
न जाने कल कोई हँसाने वाला मिले न मिले,
इसलिये आज ही
हसरत निकाल लिया करो “.

भगवान महावीर का समवशरण कितने योजन

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