ऐतिहासिक भक्तामर विधान से हुई श्रीफल महोत्सव की शुरुआत

Sept 23, 2017

-दो दिवसीय श्रीफल महोत्सव के पहले दिन रजत द्रव्य से हुआ विधान
-आज होंगे देश के छह पत्रकार सम्मानित, होगा संस्कृति महोत्सव का आयोजन
-श्रीफल महोत्सव का पहला दिन बना खास, 48 रजत कलश से हुआ पूजन
-आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज, मुनि श्री प्रमुख सागर जी महाराज के सान्निध्य एवं मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज के निर्देशन में हो रहा है श्रीफल महोत्सव
-भक्तामर विधान पुस्तक का भी हुआ विमोचन
बैंगलुरु। देश भर से श्रीफल महोत्सव में सम्मिलित होने वाले श्रद्धालुओं के लिए शनिवार का दिन खास था। कर्नाटका जैन भवन में महोत्सव के दौरान धर्म की गंगा बही। हर कोई भक्ति में झूमता नजर आया। बैंगलुरु समेत देशभर से आए भक्तों ने नाचते-गाते हुए पूजन पाठ के दौरान अघ्र्य समर्पित किया। इस दौरान श्रद्धालुुओं को पुष्पगिरि प्रणेता आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज, प्रमुख सागर महाराज, पूज्य सागर महाराज का सान्निध्य मिला।
श्रीफल महोत्सव के पहले दिन भक्तामर विधान अनूठा होने के साथ देश में पहली बार रजत निर्मित अक्षत, पुष्प, नेवैद्य, दीप, धूप, फल के साथ विधान संपन्न हुआ। भक्तामर पाठ में 48 काव्य होने के कारण 48 रजत कलशों की स्थापना के साथ विशेष पूजन किया गया। देश में पहली बार प्रोजेक्टर पर भक्तामर विधान चित्र के साथ दिखाया गया। इस मौके पर रत्न वर्षा एवं पुष्प वर्षा की गई। कार्यक्रम में भक्तामर विधान पर धार्मिक श्रीफल परिवार ट्रस्ट की ओर से प्रकाशित पुस्तक भी विमोचन हुआ। पुस्तक का प्रकाशन पन्नालाल-सरोज देवी सरावगी, राहुल सरावगी के सहयोग से किया गया है। इससे पहले जिनेंद्र भगवान का विशेष अभिषेक किया। भक्तामर विधान से पहले इंद्र-इंद्राणियों ने आचार्य महाराज को श्रीफल भेंटकर आमंत्रित किया।
बबीता सरावगी, सुशीला बज ने बताया कि इस भक्तमार विधान की खास विशेषता यह है कि भगवान का 20 परिवारों द्वारा अभिषेक किया गया। 48 रजत कलशों की स्थापना, हवन में मंत्रों की आहुति, दो विधान मंडल पर एक स्थान पर एक साथ अघ्र्य समर्पित किए गए। दीप प्रज्ज्वलन सुरेंद्र हेगड़े परिवार ने किया। चेन्नई निवासी बिमल कुमार एवं गुणमाला सौधर्म इंद्र-इंद्राणी बने।
त्यागी सेवा समिति के डी. सुरेंद्र कुमार, अनिता ने बताया कि बैंगलुरु वासियों को पहली बार श्रीफल महोत्सव के तहत रजत कलश के साथ भक्तमार विधान करने का सौभाग्य मिला। प्रतिष्ठाचार्य राजस्थान के सलूंबर निवासी सुरेंद्र जैन ने विधि-विधान, भक्ति गीतों के साथ पूजन कार्यक्रम संपन्न कराया। इस मौके पर कर्नाटका जैन एसोसिएशन के अध्यक्ष ए. जितेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष पी. वाई. राजेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
अनिल दोसी, नरेंद्र शाह सागवाड़ा, कोमल जैन, सोमचंद जैन, इंद्र-इंद्राणियों में निहालचंद पांड्या परिवार, पद्माप्रसाद जैन-जयश्री जैन, भैरूलाल गंगलाल परिवार, तेजराज-मैना देवी  बाकलीवाल, बसंतीलाल-शशिप्रभा पाटनी बैंगलुरु, प्रकाशचंद्र-सपना जैन इंदौर, किशोर जैन-सिंपी जैन सीकर, चैनरूप-शारदा बगड़ा गुवाहाटी, माया सेठी परिवार, विकास जैन-शालू जैन बैंगलुरु, शांतिलाल टोंग्या परिवार, अशोक कुमार-सुधा जैन मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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देव, शास्त्र, गुरु का करें स्मरण
पुष्पगिरि प्रणेता आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज ने कहा कि भक्तामर स्त्रोत का पाठ करने से पुण्योदय होता है। द्रव्य जितना कीमती होगा, लाभ उतना ज्यादा मिलेगा। भक्तामर स्त्रोत का पाठ करने से कई परेशानी एवं कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। रोजाना देव, शास्त्र एवं गुरु का स्मरण करना चाहिए।

श्रीफल न्यूज़

आज का सुविचार

” कुछ हँस के बोल दिया करो,
कुछ हँस के टाल दिया करो ।
यूँ तो बहुत परेशानियाँ हैं तुमको भी मुझको भी,
मगर कुछ फैसले वक्त पे डाल दिया करो ।
न जाने कल कोई हँसाने वाला मिले न मिले,
इसलिये आज ही
हसरत निकाल लिया करो “.

भगवान महावीर का समवशरण कितने योजन

आज के विजेता सभी प्रश्न

किसके अतिशय के कारण समवशरण में सभी अंतर्मुहूर्त में सीढ़ियाँ चढ़ जाते हैं?

Answer- केवली के अतिशय के कारण

विजेता का नाम : अंकिता दोषी धरियावाद

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