विहार के माध्यम से मुनि करते हैं जन की धर्म प्यास शांत

27 Mar 2017

साधु चलते फिरते तीर्थ होते हैं। बहती नदी के समान निर्मल स्वभाव वाले दिगम्बर मुनि अपने विहार के माध्यम से जन-जन की धर्म की प्यास को शांत करते हैं। यह बात 108 श्री पुष्पदन्त सागर जी महाराज ने विहार के दौरान कही। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि आचार्य श्री ससंघ का विहार पुष्पगिरी तीर्थ, इंदौर से हैदराबाद की ओर चल रहा है। पुष्पगिरी में चातुर्मास पूर्ण कर आचार्य संघ ने सिद्धवरकूट, सनावद होते हुए देशगांव में प्रवेश किया। खंडवा जिले की सीमा में प्रवेश पर सकल दिगम्बर समाज खंडवा द्वारा श्रीफल भेंट कर आचार्य संघ को खंडवा पधारने का निमंत्रण दिया गया। संघ में विराजमान मुनि श्री पूज्य सागरजी ने बताया कि आचार्य श्री ने दो अप्रैल तक हैदराबाद पहुंचने का संकल्प लिया है, जहां वह अपने शिष्य मुनि श्री प्रमुख सागरजी के सान्निध्य में भव्य महावीर जयंती महोत्सव में भाग लेंगे। अपने इसी संकल्प को पूर्ण करने के लिए आचार्य श्री समाजजनों के बीच उपस्थित नहीं हो पा रहे है। आचार्य संघ ने देशगांव में आहारचर्या सम्पन्न कर दोपहर में डुलहार की ओर विहार किया। रात्रि विश्राम छेगांव माखन से आगे होगा। इस मौके पर खंडवा समाज की ओर से अविनाश जैन, नवीन लुहाडिय़ा, मनीष पाटनी, पंकज सेठी, अनिल बडज़ात्या, कैलाश पहाडिय़ा, सुरेश लुहाडिय़ा, रू पांशु जैन, सुभाष गदिया, राजकुमारी जैन, स्वीटी जैन, शांति बैनाडा, विजयाबाई पहाडिय़ा उपस्थित थे।
श्रीफल न्यूज के लिए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट

श्रीफल न्यूज़

आज का सुविचार

” कुछ हँस के बोल दिया करो,
कुछ हँस के टाल दिया करो ।
यूँ तो बहुत परेशानियाँ हैं तुमको भी मुझको भी,
मगर कुछ फैसले वक्त पे डाल दिया करो ।
न जाने कल कोई हँसाने वाला मिले न मिले,
इसलिये आज ही
हसरत निकाल लिया करो “.

भगवान महावीर का समवशरण कितने योजन

आज के विजेता सभी प्रश्न

किसके अतिशय के कारण समवशरण में सभी अंतर्मुहूर्त में सीढ़ियाँ चढ़ जाते हैं?

Answer- केवली के अतिशय के कारण

विजेता का नाम : अंकिता दोषी धरियावाद

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