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महके फूल और दमके, जब भगवान के चरणों में चढ़े

  • भगवान आदिनाथ की जन्म जयंती आयोजन
  • एक गमला, जिनेन्द्र के नाम अभियान शुरू 

उदयपुर। गुलाब के फूलों की खुशबू से महका परिसर और दूसरी तरफ धर्म-अध्यात्म की सरिता, उसमें गोते लगाते भक्तजन। यह समां था अन्तर्मुखी मुनि पूज्यसागर महाराज के सान्निध्य में पहाड़ा दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित भगवान आदिनाथ की जन्म जयंती समारोह का। इस दौरान सबसे पहले भगवान का पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा की गई। बाद में 1008 गुलाब के फूलों से सहस्त्रनाम के फूल भगवान के चरणों में समर्पित किए गए। भगवान आदिनाथ पर शांतिधारा सूर्या जैन, अमित जैन, राकेश जैन, अरविन्द्र जैन, चिराग जैन, प्रिंस जैन और सहस्त्रनाम के 1008 पुष्प दीपिका जैन को चढ़ाने का लाभ प्राप्त हुआ। पद्मप्रभु पर शांतिधारा कमलेश जैन,कमल बाई,प्रकाश  को प्राप्त हुआ।

भगवान आदिनाथ जयंती से और आचार्य श्री शांति सागर महाराज मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष की स्मृति में श्रीफल फाउंडेशन की तरफ से पौधारोपण को लेकर एक नवाचार किया गया। पहली बार एक अभियान एक गमला, जिनेन्द्र के नाम शुरू किया गया। अन्तर्मुखी पूज्यसागर महाराज की प्रेरणा से यह नवाचार किया गया है। इसके पीछे मंशा है कि इससे पौधारोपण को लेकर लोग जागरूक होंगे। कई पेड़-पौधे घरेलू आवश्यकता की पूर्ति भी करते हैं। मसलन घर में अगर गुलाब का पौधा लगा है तो उसके फूल धार्मिक अनुष्ठान में काम आते हैं। सुरेन्द्र दलावत, प्रकाश जैन, मांगीलाल,रमेश ने इसे जन-जन का आंदोलन बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। मुनि पूज्य सागर महाराज में कहा की आदिनाथ भगबान का जन्म अभिषेक 1008 कलशों से हुआ था। एक कलश 8 योजन ऊंचा  4 योजन मोटा और 1 योजन का मुख था, ऐसे में उस समय के दृश्य को महसूस करके देखें। सोचें और सामाजिक सरोकार में अधिकाधिक रूप से स्वयं को समर्पित करते रहें।

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