मेरी मॉ

आज मॉ मेरे स्मृतिपटल यादों के पुष्प महका रही हैं। उपकारी,परोपकारी,करूणादानी मॉं की आध्यात्धिक याद आ रही है। जिसने आत्मीयता से पुरूषार्थ करके ऐसा काम किया है। मैं जहॉ भी जाता हॅू वहॉं अनेक परिवार मेरे हो जाते है। उनकी आस्था मेरे प्रति हो जाती है। झोपड़ी से लेकर कोठियों तक वे मुझे अपने लगते है। और उनको मैं भी अपना लगता हूँ ऐसे कई घर – शहर में है जो पद्मश्री माता जी का समाचार पूछने आते हैं। आते मॉ के वात्सल्य और उपकारों को स्मरण दिलाते हुए कहने लगते है कि आज हम जो कुछ भी है माता जी की बदोलत है। माता जी ने हमारे बेटे को नया जीवन दिया है। हमारी बेटी को सद्मार्ग से लगाया है। हमारा परिवार माता जी ने संभाला है। हमें धर्म से लगाया है। उनके आशीर्वाद से हम फल-फूल रहे है, उनने हमारे परिवार की काया पलट कर दी। पद्मश्री के नाम फर्म दुकान अच्छी चल रही है। …

आज का सुविचार

” कुछ हँस के बोल दिया करो,
कुछ हँस के टाल दिया करो ।
यूँ तो बहुत परेशानियाँ हैं तुमको भी मुझको भी,
मगर कुछ फैसले वक्त पे डाल दिया करो ।
न जाने कल कोई हँसाने वाला मिले न मिले,
इसलिये आज ही
हसरत निकाल लिया करो “.

भगवान महावीर का समवशरण कितने योजन

आज के विजेता सभी प्रश्न

किसके अतिशय के कारण समवशरण में सभी अंतर्मुहूर्त में सीढ़ियाँ चढ़ जाते हैं?

Answer- केवली के अतिशय के कारण

विजेता का नाम : अंकिता दोषी धरियावाद

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