जैन धर्म के अनुसार रक्षा बँधन क्यों?

प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबंधन अत्यंत प्राचीन पर्व है। इसकी परम्परा अठारहवें तीर्थंकर अरहनाथ के तीर्थ से महामुनि विष्णुकुमार के निमित्त से प्रारंभ हुई है। इस पर्व की पौराणिक कथा इस प्रकार है... उज्जैनी नगरी में राजा श्रीवर्मा राज्य करते थे उनके बलि, नामुचि, बृहस्पति और प्रह्लाद आदि चार…

निर्लोभी विजयी सदा

कथा सागर में आज की कहानी है... अवंति देश की उज्जियनी नगरी में धनदेव नामक सेठ रहता था। जिसकी दो पत्नियां थी। धनमित्रा का एक पुत्र नागदत्त और पुत्री अर्धस्वामिनी थी। दूसरी पत्नि से नकुल और सहदेव दो पुत्र हुए थे। धनदेव का दूसरा विवाह हो जाने से उसने पहली…

विषयभोगो का फल विष तुल्य है..

कथा सागर में आज की कहानी है... तीर्थकर महावीर के समय की घटना है। जम्बूद्वीप में हेमांगद नाम का एक देश था। इस देश की राजधानी राजपुर थी एवं राजा का नाम सत्यंधर था। उनकी रानी का नाम विजयादेवी था। राजा का काष्ठांगार मंत्री और रुद्रदत्त पुरोहित था। एक रात…

माँ का पछतावा

माँ का पछतावा एक समय की बात है। एक महिला ने एक नेवला पाल रखा था। वह नेवले को दूध और लप्सी खाने को देती थी और उसका खूब ध्यान रखती। एक दिन आँगन में अनाज दलते समय उसने बच्चे को कमरे की खाट से उतारकर नीचे सुला दिया और…

जीत सदैव सत्य की ही होती है..

प्राचीन समय में सिंहपुर नगर था जिसके राजा सिंहसेन और रानी रामदत्त थीं। सत्यघोष राजा का एक मंत्री था ,इसका मुख्य नाम तो श्रीभूति था किन्तु यह अपने आप को सत्यघोष कहता था। इसी नगर में एक भद्रमित्र नाम का व्यापारी धन कमाकर आया और उसने सत्यघोष से नगर में…

रात्रि भोजन का करें त्याग

बहुत समय पहले की बात है। एक नगर में एक महान तपस्वी, दिगम्बर मुनि सागरसेन रुके हुए थे। उनके तप का माहात्म सुनकर वहाँ के राजा व नगरवासी मुनि के दर्शन के लिए पहुँचे। नगर के बाहर एक श्रृगाल रहता था, जिसने गाजे बाजे की ध्वनि किसी के मरने पर…

जा आगे जा।”

एक गांव में एक लकडहारा रहा करता था।वह हर रोज जंगल में जाकर लकडी काटता और उसे बाजार में बेच देता। किन्तु कुछ समय से उसकी आमदनी घटती चली जा रही थी,ऐसी परिस्थिति में उसकी एक संन्यासी से भेंट हुई। लकडहारे ने संन्यासी से विनम्र बिनती की और बोला''महाराज कृपा…

मौन अच्छा है या बोलना अच्छा?

एक व्यक्ति ने घर में बिल्ली और कुत्ता—दोनों पाल रखे थे। बिल्ली बहुत बोलती थी, दिन और रात म्याऊं-म्याऊं करती थी। मालिक को बड़ा अटपटा लगता, वह सोचता—सारे दिन म्याऊं-म्याऊं करती है, आराम भी नहीं करने देती। जब एक दिन बिल्ली म्याऊं-म्याऊं कर रही थी, मालिक उसे खूब पीटते हुए…

सूझ – बूझ का अनुपम परिचय

भगवान महावीर के काल में श्रेणिक नामक राजा राजगृही के राजा थे। उनके पुत्र का नाम अभयकुमार था। यह कहानी उनके तीसरे पूर्वभव की है। जब इस भव में वह अज्ञानी था की उसे किसकी पूजा करना चाहिए किसकी नहीं उसे इस बात का भी ज्ञान नहीं था। लेकिन इसके…

क्षण में राजा, क्षण में रंक…..

एक समय की बात है कुणाल नामक देश में एक नगरी श्रावस्ती थी। श्रावस्ती नगरी का राजा सुकेतु था, जिसे जुआ खेलने की बुरी लत थी। यह लत इतनी बढ़ गई कि वह अपना राज-काज भूल कर उसी में मस्त रहने लगा। अपने पद की गरिमा भूलकर वह राजा जुए…

कपट का फल

एक बार कोई गीदड़ रात के समय जंगल में से भागकर किसी गांव में आ गया, और जब कहीं उसे बाहर जाने का रास्ता ना मिला तो एक घर में घुस गया। गीदड़ को घर में देखकर सब लोग उसे मारने दौड़े। गीदड़ भागता भागता घर के बाहर आया, परन्तु…

बन्दर और बया

एक बया ने किसी वृक्ष पर सुन्दर घोंसला बना रखा था। एक बार की बात है, वर्षा ऋतु में ठण्डी हवा चलने लगी, औऱ मूसलाधार पानी बरसने लगा। इतने में वहां एक बन्दर आया जो ठण्ड से कांप रहा था और वर्षा से बचने के लिए किसी स्थान की तलाश…

विषयभोगो का फल विष तुल्य है..

तीर्थकर महावीर के समय की घटना है। जम्बूद्वीप में हेमांगद नाम का एक देश था। इस देश की राजधानी राजपुर थी एवं राजा का नाम सत्यंधर था। उनकी रानी का नाम विजयादेवी था। राजा का काष्ठांगार मंत्री और रुद्रदत्त पुरोहित था। एक रात रानी ने दो स्वप्न देखे। पहला राजा…