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भगवान की अष्टद्रव्य के साथ भक्ति करने से होती है अशुभ कर्मों की निर्जरा-अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर जी महाराज

  • सिद्धचक्र महामंडल विधान का दूसरे दिन

उदयपुर। पद्मप्रभ प्रभु दिगंबर जैन मंदिर पहाड़ा, उदयपुर में अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर जी महाराज के सानिध्य में चल रहे  सिद्धचक्र महामंडल विधान में दूसरे दिन 3 मार्च को दो पूजन किये गए, जिसमे पहले पूजन में 16 और दूसरे पूजन में 32 अर्घ्य मण्डल पर चढ़ाए गए। इस अवसर पर सौधर्म इन्द्र बनने का लाभ गणेशलाल जैन और यज्ञनायक बनने का लाभ अशोक जैन को प्राप्त हुआ। विधान में ऊँ ह्रीं अर्हं अ सि आ उ सा नमः का जाप हवन में आहूति के साथ किया गया। भगवान की शांतिधारा रमेश जैन, गुलाब बाई, मधु चित्तौड़ा, सुरेश जैन द्वारा की गई। सिद्ध चक्र महामंडल विधान में जलमाला का महार्घ्य चढ़ाने का लाभ मांगीलाल जैन को प्राप्त हुआ। 

 कार्यक्रम में अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि भगवान की अष्टद्रव्य के साथ भक्ति करने से अशुभ कर्मों की निर्जरा होती है। संसारी जितने भी काम करे, उन्हें कषाय, राग, द्वेष, मोह, लोभ, भय, लालच के साथ न करे तो वे सब पुण्य का कारण होते हैं। मुनि श्री ने कहा कि इसका अर्थ यह है कि सकारात्मक सोच से किया गया हर कार्य धर्म की श्रेणी में आता है। भगवान की भक्ति करने के लिए भी पुण्य चाहिए। आज तुम यहां बैठकर अगर भक्ति कर रहे हो तो यह भी पुण्य का फल है। आज जो अर्घ्य चढ़ाए गए हैं, वे सब सिद्धों के गुणों और उनके अनेक नामों से चढ़ाए गए हैं।  

महिला दिवस पर होगा विशेष अभिषेक

इस अवसर पर धनराज सेठ ने बताया कि आगामी 8 मार्च को महिला दिवस पर एक विशेष आयोजन किया जाएगा, जिसमें महिलाओं द्वारा विशेष अभिषेक किया जाएगा। उदयपुर जैन समाज की हर महिला इसमें हिस्सा ले सकती है। इस दिन अनेक द्रव्यों से पंचामृत अभिषेक किया जाएगा।

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