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श्रवणबेलगोला आए जापानी विद्यार्थी रह गए आश्चर्यचकित, वजह यह

बेंगलूरु। भारत के सात आश्चर्यों में से एक है श्रवणबेलगोला। जापान के स्टूडेंट्स ने जब इसे देखा तो निहारते ही गए। भगवान बाहुबली की विशाल प्रतिमा को लेकर उनके मन में इतनी उत्सुकता थी कि सवालों की बौछार लगा दी। इस दौरान उनकी सभी जिज्ञासाओं को शांत किया गया। असल में जापान के चिकूशी विश्वविद्यालय में अध्ययनरत जापानी विद्यार्थी यहां का दौरा कर जैन परम्पराओं व इतिहास से रू-ब-रू हुए। कनाजी तीर्थस्थल पर  जापान के चिकूसी विश्वविद्यालय के छात्रों ने जैन इतिहास और प्राचीन वस्तुओं के लिए शैक्षणिक दौरा किया। छात्रों ने महामस्तकाभिषेकम और वैराग्य प्रतिमा बाहुबली के बारे में उत्सुकता से कई सवाल पूछे। श्रवणबेलगोला क्षेत्र में 2300 साल पुरानी जैन विरासत है और यह ध्यान और सलेलेखाना की कब्र की मृत्यु के लिए प्रसिद्ध है। विद्यार्थियों को बताया गया कि इस क्षेत्र में 500 से अधिक शिलालेख हैं। चीकुशी विश्वविद्यालय के प्रो टोमोयोकी ऊनो ने बताया कि जापानी में पूछे गए प्रश्नों का अंग्रेजी में अनुवाद किया गया और छात्रों द्वारा बार-बार जापानी में श्री श्री का जवाब दिया गया। बाहुबली की अखंड मूर्ति का निर्माण गंगा वंश के मंत्री चावंडराय और मूर्तिकार अरिष्टनमयी ने किया था। इस दौरान हम्पा नागराजेय ने संबोधित किया। बाहुबली के बारे में सर्वेश जैन ने बताया। आयोजन से पहले छात्रों ने विंध्यगिरि के बाहुबली दर्शन प्राप्त किए। व्याख्याताओं और क्षेत्र के 25 छात्रों को जैन साहित्य की पुस्तकों के साथ सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में छात्रों ने भारत का राष्ट्रगान और जापानी राष्ट्रगान गाया बताते चले कि श्रवणबेलगोला कर्नाटक राज्य के हासन जिले में स्थित है। गोम्मटेश्वर स्थान पर स्थित है। यह बेंगलुरु शहर से लगभग 150 और मैसूर शहर से यह 80 किमी की दूरी पर है। यहां पर भगवान बाहुबली की विशालकाय प्रतिमा स्थापित है, जो पूर्णत: एक ही पत्थर से निर्मित है। इस मूर्ति को बनाने में मूर्तिकार को लगभग 12 वर्ष लगे। बाहुबली को गोम्मटेश्वर भी कहा जाता था। कहते हैं कि ऋषभदेव के जंगल जाने के बाद राज्याधिकार के लिए बाहुबली और भरत में युद्ध हुआ। बाहुबली ने युद्ध में भरत को परास्त कर दिया। लेकिन इस घटना के बाद उनके मन में भी विरक्ति भाव जाग्रत हुआ और उन्होंने भरत को राजपाट ले लेने को कहा, तब वे खुद घोर तपश्चरण में लीन हो गए। तपस्या के पश्चात उनको यहीं पर केवलज्ञान प्राप्त हुआ। भरत ने बाहुबली के सम्मान में पोदनपुर में 525 धनुष की बाहुबली की मूर्ति प्रतिष्ठित की। प्रथम सबसे विशाल प्रतिमा का यहां उल्लेख है। श्रवणबेलगोला में चन्द्रगिरि और विंध्यगिरि नाम की 2 पहाडिय़ां पास-पास हैं। पहाड़ पर 57 फुट ऊंची बाहुबली की प्रतिमा विराजमान है। यहां हर 12 वर्ष बाद महामस्तकाभिषेक होता है।

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