मां से बड़ा तो ईश्वर भी नहीं होता - मुनि पूज्य सागर महाराज

मां से बड़ा तो ईश्वर भी नहीं होता - मुनि पूज्य सागर महाराज

मां तो केवल पुण्यशाली व्यक्ति को मिलती है

 

किशनगढ़ ।

·         जीने की राह प्रवचन माला के तीसरे दिन आर के कम्युनिटी सेंटर किशनगढ़ में अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज जो कहा उसका अंश

·         माँ से बढ़कर संसार में ईश्वर भी नहीं होता ।

·          ईश्वर को जन्म देने वाली भी मां ही हुआ करती है ।

·         परमात्मा की भक्ति तुमसे हो ना हो पर सुबह-सुबह मां के चरणों का स्पर्श जरूर कर लेना ।

·          दुनिया में  मां का रिश्ता सब से पवित्र और निर्मल होता है ।

·         जीवन में दुख,अशांति हैघर का वास्तु ठीक नही हैग्रहों की दिशा ठीक नही चल रही है तो मां के चरणों का स्पर्श कर लेना और अगर मां नही होती तो मां के चरण बनाकर घर में रख लेना सुबह सुबह उनका स्पर्श कर लेना सब दुख दूर हो जाएंगे ।

·         मां की ममता और वात्सल्य ऐसा होता है कि उसके अंदर भले शक्ति न होफिर भी वह दुनिया से लड़ने को तैयार हो जाती है ।

·         दुनिया में मां ही एक ऐसी है जो अपने बच्चे के पति से झूठ बोल कर बच्चे को पिता और परिवार के लोगों से बचाती है ।

·         जिसे वह अपना परमात्मा मानती है उसे भी वह झूठ बोल देती है मात्र अपने बच्चे के लिए ।

·         मां भगवान का पूजनवंदन और ध्यान करती है तो वहां पर भी अपने बेटे के लिए ही दुआ मांगती है। उनसे यही कहती है कि बच्चा सुखशांति से इस संसार में रहे ।

·          बच्चे की गलती होने पर भी वह दूसरों के सामने तो यही कहेगी कि मेरे बच्चे की गलती नही है। वह कभी भी अपने बच्चे को किसी के सामने शर्मिंदा नही होने देती है ।

·          दुनिया में मां का महत्व तो वही बता सकता है जिसे मां का प्यार नही मिला हो । जो बचपन से अनार्थ रहा होजिसने मां के हाथ का भोजन नही किया होजिसके दुख दर्द को पूछने वाली मां ना हो । वह तुम्हे मां का महत्व समझा सकता है ।

·         मां तो केवल पुण्यशाली व्यक्ति को मिलती है । 

·         जीने के लिए जैसे श्वासपेट के लिए भोजन की आवश्यकता होती है उसी तरह जीवन में मां की आवश्यकता होती है ।

·          जीवन में अनुभवों का खजाना मां से ही मिलता है। दुनिया से लड़ने की शक्ति और जीने की कला मां ही सीखा सकती है ।

·         महात्मापरमात्मा जैसे पवित्र शब्दों के अंत में भी मा शब्द ही आता है । जिससे यह पता चलता है कि मां कितनी पवित्र आत्मा है ।

·          शिक्षा के लिए सरस्वतीधन के लिए लक्ष्मी और शक्ति के लिए दुर्गा का पूजन-आराधना होती है यह भी सब मां का ही स्वरूप हैं ।

·          बच्चा जब मां के गर्भ में आता है उस दिन से मां दुनिया सेअपनी पसंद ना पसंद से नाता तोड़ लेती है। वह अपने उठने बैठने तक को सीमित करने के साथक्या खाए क्या ना खाए यह सब बच्चे की सेहत के अनुसार करने लगती है । पने आसपास की दीवारों पर लगे चित्र तक बदल देती हैताकि कि बच्चे पर बुरा प्रभाव ना पड़े ।

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