जिंदगी बहुत ही खूबसूरत है, पर हम इसे तनाव के बोझ से भारी कर देते हैं : ब्रह्मकुमारी शिवानी

जिंदगी बहुत ही खूबसूरत है, पर हम इसे तनाव के बोझ से भारी कर देते हैं : ब्रह्मकुमारी शिवानी

जयपुर 3 अक्टूम्बर 2019 / धर्म डेक्स / प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रतिनिधि और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वक्ता ब्रह्माकुमारी शिवानी अपने प्रवचनों में जीवन की छोटी-छोटी बातों पर हमारा ध्यान आकर्षित करती हैं। बीके शिवानी बहन की ये बातें सुनने में बहुत ही छोटी लगती हैं लेकिन हमें जीवन में खुश रहने और हर परिस्थिति का सामना हंसते-हंसते करने की सीख दे जाती हैं। आइए आपको बताते हैं ब्रह्मकुमारी शिवानी के अनमोल और प्रेरणादायक कथन।

 

 

— आज भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सिर्फ अपने लिए ही जी रहे हैं। जब हम दूसरों के लिए नहीं जी रहे तो दूसरों से कैसे उम्मीद करें कि वह हमारे लिए जीए। हमारे अंदर बहुत कमी हैजो दूसरों से लेना तो चाहता है लेकिन देना नहीं चाहता। देना सीखेंचाहे प्रेम हो या कोई सहायता हो।

— इंसान को माफी मांगना सीखना चाहिए और माफ करना भी। जीवन में खुश रहने के लिए अहम का भाव और नेगेटिविटी खत्म करने की जरूरत है। जीवन में हम जैसा व्यवहार और कार्य दूसरों के प्रति करेंगे। वैसा ही कार्य और व्यवहार कुछ समय बाद हमारे साथ होने लगेगा। 

— जीवन में मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। लगन और अनुशासन दोनों ही जीवन में सफलता हासिल करने के लिए जरूरी हैं। जीवन में खुश रहने और सफलता पाने के लिए आत्म चिंतन व ध्यान जरूरी है। ध्यान से आत्मा शक्तिशाली बनती है और तभी चुनौतियों को अवसर व सफलता में बदला जा सकता है।

खुश रहने के लिए सात्विक भोजन करना चाहिएक्योंकि जैसा अन्न हम ग्रहण करते हैं वैसा ही हमारा तन-मन होता है। सामाजिक ताना-बाना कमजोर न होइसके लिए दुआएं कमाएं। 

किसी को दु:ख  देकर कमाए गए धन से लक्ष्मी की कृपा हासिल नहीं होती है। पैसा आने के बावजूद मन की शांति खो जाती है। रिश्तों में टकराहट आने लगता है। इनसे बचने का एकमात्र उपाय सत्कर्म है। 

आपका दिमाग ही आपका सबसे अच्छा दोस्त हैजब तक आप उसे कंट्रोल करते हैं लेकिन यदि आपका दिमाग आपको कंट्रोल करता है तो वह आपका सबसे बड़ा दुश्मन है।

जैसा हम सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं। ये बात आज के समय में बिल्कुल सटीक बैठती है। हमारी सोचविचार और संकल्प जैसे होते हैंहम वैसे ही बन जाते हैं। 

जिंदगी बहुत ही खूबसूरत है लेकिन हम इसे तनाव के बोझ से भारी और कठिन कर देते हैं। चंद बातों का ध्यान रखकर हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में भी करिश्मा कर सकते हैं। 

शांतिसुख और प्यार ये हमारे भीतर ही हैंफिर भी हम इसकी तलाश में भटकते रहते हैं। दूसरों से प्यारशांति और सुख की उम्मीद करते हैं और नहीं मिलने पर दु:खी हो जाते हैं। हमें अपने अहम को त्याग कर दूसरों को सहयोग देना सीखना होगा। यही नहींहर किसी को पॉजिटिव वाइब्रेशन देकर उसका सहयोग करना है।

सत्य एक डेबिट कार्ड की तरह हैजिसका पहले भुगतान करना है फिर आनन्द लेना है जबकि झूठ एक क्रेडिट कार्ड की तरह हैजिसमें पहले तो आनन्द लेना है फिर उसका हमें भुगतान करना है।

भागदौड़ भरी इस जिंदगी में हम खुद से मुलाकात करना भूल जाते हैं। दूसरों के बारे में सोचने में ही हम पूरा वक्त बिता देते हैंअपने बारे में सोचने का वक्त ही कहां मिलता है। हम जिंदगी दूसरों के हिसाब से जीते हैं। परचिंतन हमारा पहला काम हो गया है। जिसकी वजह से जिंदगी इतनी भारी और उदास सी हो गई है। जब अपने लिए जीएंगे तभी असल मायने में जीना होगा। इसलिए जिंदगी को देखने और जीने का नजरिया जरा बदलकर देखिए।

वर्तमान में ज्यादातर लोग सिर्फ इसलिए दु:खी और विफल हैंक्योंकि वे अपनी अक्ल के उपयोग के बजाय दूसरों की नकल ज्यादा करते हैं।

जो लोग सिर्फ आपको जरूरत के समय याद करते हैं। उनके काम जरूर आना चाहिएक्योंकि अंधेरे के समय ही रोशनी खोजी जाती है और वह रोशनी आप हो।

Leave a Comment