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12 श्रावक – श्राविका ने एक साथ पहली बार किए 10 उपवास

भीलूड़ा। अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के सान्निध्य और आशीर्वाद से स्थानीय दिगम्बर जैन समाज के 12 श्रावक- श्राविका ने एकसाथ पहली बार पर्युषण पर्व पर 10 उपवास की साधना की। सभी के उपवास का पालना सोमवार को दिगम्बर जैन मंदिर के प्रांगण में अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के  सान्निध्य और समाज को लोगों की उपस्थिति में कराया गया। सर्वप्रथम जिनेन्द्र का पंचामृत अभिषेक, पूजन किया गया, उसके बाद भक्तामर विधान हुआ। विधान के बाद सुबह 9:45 बजे मुनि के मार्गदर्शन में संघस्थ दीदी तृष्टि ने नारियल के जल से सभी तपस्वियों का पालना करवाया। साथ ही परिवार के सदस्यों, सकल जैन समाज भीलूड़ा के पंच महानुभावों और बाहर से आए मेहमानों का पालना करवाया।
इस अवसर पर समाज के सभी श्रावक- श्राविका के साथ बाहर से आए सभी मेहमान मौजूद रहे। मंगलवार को मुनिश्री पूज्य सागर महाराज ने सुबह 4 बजे केशलोचन भी किए।

अन्तर्मुखी का संदेश

10 उपवास आप सभी तपस्वियों के जीवन में संस्कारों का शंखनाद करेगा। उपवास की स्मृतियों में आप सभी को ऐसा एक नियम लेना चाहिए जिससे आप जिनेन्द्र देव, गुरु और शास्त्र से सदैव जुड़े रहें। दस उपवास जो आप सबके बने, वह सब आपके पुण्य का ही उदय था। बस इस पुण्य को बनाए रखें तभी इस उपवास की साधना का पूर्ण फल आप सबको मिलेगा।  

इन्होंने किए उपवास

रचित पिता हितेश जैन, प्राची पति निशांत जैन, संध्या पति भावेश जैन, आस्था पिता भरत शाह, प्रेक्षा पिता कमलेश शाह, दिया पिता मुकेश शाह, दीपिका पति मोहित जैन,अक्षय पिता मनोज जैन,मोनिका पति कल्पेश जैन,कल्पेश पिता धनपाल शाह,हिमेश पिता कमलेश जैन, वर्षा पति विनोद जैन। इन 12 उपवास करने वालों में मोनिका- कल्पेश पति- पत्नी हैं। इन दोनों ने जोड़े के साथ उपवास किए हैं।

12 उपवास करने वालों के उद्गार:

धर्म का सही अर्थ जानने को मिला

घर पर सुना था कि मुनि पूज्य सागर महाराज एक भी उपवास नहीं कर सकते थे, पर चातुर्मास में मौन साधना के 24 उपवास और 24 दिन बिना अन्न के आहार ले रहे हैं तो मेरे मन में भी आया कि साधना से शक्ति आती है। मम्मी भी हमेशा कुछ ना कुछ व्रत करती रहती थीं, तो वह संस्कार का भी प्रभाव रहा। 10 दिन शांति से निकले। पहली बार उपवास किया तो शरीर की पीड़ा थी, पर मुनि श्री के आशीर्वाद से उसका एहसास नहीं हुआ। वास्तव में, धर्म का सही अर्थ जानने को मिला।

सागर महाराज के आशीर्वाद से ही पूरे हुए उपवास

मेरे उपवास तो मुनि पूज्य सागर महाराज के आशीर्वाद से ही पूरे हुए हैं। मुनि के सान्निध्य में सामायिक, प्रतिक्रमण रोज करते थी तो अच्छा लगा। इतने नजदीक से किसी साधु से बात करना मेरे जीवन का पहला मौका ही था। पहली बार उपवास किया तो उपवास के दौरान शरीर में पीड़ा हुई, पर अन्य तपस्वियों और मुनि श्री को देखकर अपनी पीड़ा भूल जाती थी। उपवास के समय इतना समझ पाई कि धर्म,गुरु,स्वाध्याय से कठिन से कठिन कार्य भी आसान हो जाता है।

गुरुदेव ने सबका ध्यान रखा

मुझे उपवास करने की हिम्मत नहीं थी। एक-दो उपवास करने के भाव थे, पर न जाने कहां से हिम्मत बढ़ती गई और उपवास हो गया। मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि मैंने 10 उपवास कर लिया है। सच कहूं तो इन उपवास को पूरा करने में जो मुझे शक्ति मिली, वह अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज को देखकर मिली। उपवास के समय गुरुदेव ने सबका ध्यान रखा। किसे क्या तकलीफ है, वह पूछते थे और उसका उपाय बताते थे तो अच्छा लगा और हिम्मत हो गई कि गुरु और शांतिनाथ भगवान हैं सब अच्छा होगा। उपवास के समय यह जानने को मिला कि धर्म कथाओं से दुख को कम करने का सहारा मिलता है।

उपवास के समय मन की निर्मलता बढ़ी

दो-तीन बार 5 उपवास की, पर 10 नहीं हो पाए। इस बार मन दृढ़ता, परिवार का साथ और सबसे बड़ी बात मुनि पूज्य सागर महाराज का आशीर्वाद था। मुझे उन पर श्रद्धा थी कि उनके आशीर्वाद से उपवास पूरे हो जाएंगे। पहले कोरोना होने से डर था कि कुछ हो न जाए और मुनि श्री कहते थे कुछ नहीं होगा। मुनि श्री के कारण मेरी 10 उपवास की इच्छा पूरी हो गई।  10 दिन तक सामायिक, प्रतिक्रमण साधना में समय निकला। प्रतिदिन मुनि श्री का सम्बोधन मिलता था कि उपवास हो जाएंगे, अच्छे से हो जाएंगे। और वास्तव में उपवास हो भी गए। उपवास के समय में मन की निर्मलता बहुत हुई और विचारों में सकारात्मकता के विचार आए हैं।

धर्म ही इंसान का सहारा

पर्युषण पर्व के पहले दिन जब पहला उपवास किया तो उसी दिन से मुनि श्री कहते थे कि 10 उपवास करना है। हिम्मत आती गई और उपवास पूरे हो गए। मुनि के सान्निध्य में प्रतिदिन पूजन किया। मुनि श्री सभी उपवास का इतना ध्यान रखते थे कि किसने अभिषेक, पूजन किया, किसने नहीं। मुनि श्री का वात्सल्य देखकर भी हिम्मत हुई। घर में पति, सासू,भाभी जी का सम्बल भी बहुत रहा। इन सब के सहयोग और मुनि के आशीर्वाद से उपवास कर पाई। धर्म को समझती नहीं हूं, पर उपवास के समय में इतना जान पाई कि धर्म ही वास्तव में इंसान का सहारा है।

उपवास की पहली प्रेरणा घर से मिली

घर में धर्म का माहौल पहले से ही है। मम्मी- पापा उपवास, धार्मिक अनुष्ठान, जाप आदि करते रहते हैं। दादा और दादी पुजन,पाठ करते रहते हैं। पहली प्रेरणा तो घर से ही मिली और हम दोनों भाई बहन ने उपवास का मानस बनाया और उसके बाद मुनि पूज्य सागर महाराज से आशीर्वाद लिया। उनके सान्निध्य में 10 उपवास की साधना प्रारम्भ की तो मुनि श्री का वात्सल्य मिला जिससे उत्साह और दुगना हो गया और 10  उपवास का पता ही नहीं चला। शरीर को कष्ट तो हुआ पर मुनि श्री के कारण हिम्मत बढ़ जाती थी। उपवास से यही जान पाया कि हर कार्य से पहले देव,शास्त्र और गुरु का आशीर्वाद आवश्यक है।

विवाह के समय के एक वचन का पालन हुआ

मेरा सौभाग्य है कि मैंने और मेरी पत्नी मोनिका ने साथ में 10 उपवास किया है। यह विवाह के समय दिए एक वचन का पालन भी हुआ। पर्युषण का पहला दिन तो उपवास करना था। दूसरे दिन रविवार का एक समय खाना था तो दुकान पर दो बजे गई। पापा ने कहा अब क्या खाना, आज भी उपवास कर लो तो उस दिन भी उपवास हो गया। पत्नी की हिम्मत और अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के आशीर्वाद और सान्निध्य में हिम्मत बढ़ती गई। मुनि श्री के आशीर्वाद से और पिताजी के सहयोग से यह 10 उपवास की साधना आज पूर्ण हो गई। उपवास के समय नकारात्मक सोच आई, पर वह तत्काल सकारात्मक सोच में बदल गई। यही उपवास का फल है।

मुनि श्री के सान्निध्य से उपवास पूरा हुआ

जब मैंने पहला उपवास किया तबतक मेरे तीन उपवास तक के ही भाव थे, किन्तु जैसे- जैसे दिन आगे बढ़ते गए, भाव भी बढ़ता गया और आज 10 उपवास पूर्ण हो गए। भगवान शांतिनाथ की कृपा एवं अन्तर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज  का सान्निध्य था, तभी यह 10 उपवास निर्विघ्न सम्पन्न हुए। मुनि श्री का प्रतिदिन सामायिक में भी सान्निध्य मिला। पिछले 10 दिनों में मैंने यह अनुभव किया कि मेरे भावों में शुद्धि आई है। मुझे इन 10 दिनों में किसी भी विषय को लेकर नकारात्मक विचार नहीं आए हैं। इस तपस्या में श्रीजी की आराधना और महाराज जी का सान्निध्य पाकर मैं गद्गद हूं।

मन में भगवान को बैठा लो सफलता मिल जाती है

मैं दस उपवास कर लिए यह मेरे पुण्य का उदय ही था । घर में सासु मां हर समय व्रत करती है उन्हें देखकर ही मन बना की उपवास करना चाहिए । इस बार भीलूड़ा में चातुर्मास अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का हो रहा तो मुझे और सम्बल मिला । मुनि श्री के आशीर्वाद से यह 10 उपवास आसानी से हो गए । मुनि श्री में बहुत हिम्मत दी और उसी हिम्मत से पर्युषण पर्व के दस उपवास की साधन आज सम्पन हूं । 10 दिन के उपवास से यह समझ में आ गया कि जब भी साधना करना होतो जिनेन्द्र भगवान को मन में बैठकर संकल्प कर लो सब कुछ अच्छा होगा ।मैंने भी भगवान शांतिनाथ को दिल में बैठकर यह व्रत पूर्ण किया ।

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