Category : मंथन पत्रिका

मंथन पत्रिका

प्रेम मकान को घर बनाता है और संवेदनाएं घर को मंदिर बना देती हैं – आचार्य अनुभव सागर जी

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लोग कहते हैं कि धर्मात्मा व्यक्ति मरकर स्वर्ग जाता है, जबकि वास्तविकता तो यह है कि धर्मात्मा व्यक्ति जहां भी जाता है वहां का वातावरण...
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मन को संयमित रखने के लिए आवश्यक है स्वाध्याय – अनीता महेन्द्र बाकलीवाल

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जिनागम के अनुसार जैन धर्म में गृहस्थ के छह आवश्यक नियम बताए गए हैं। उनमें से एक हैै स्वाध्याय- मन को संयमित रखने के लिए...
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संस्कृति मंदिर – एक अनुकरणीय पहल – अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज

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“विलासिता में डूबा जीवन उधार का,शांति की चाह, लेकिन नाम नहीं विचार का,पतन का कारण है अभाव संस्कार का” आत्मा का शुद्धिकरण करने की क्रिया...