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दसवीं में पढ़ाई के दौरान कलेक्टर सर एमडीएम विजिट करने आए थे, यह देख कर अच्छा लगा कि सरकारी योजना की इस तरह से देख रेख होती है, तभी से मन बना लिया था कलेक्टर बनना है – प्रेक्षा कोठारी

राजस्थान के डूंगरपुर जिले की साबला कस्बे की रहने वाली प्रेक्षा जैन ने यूपीएससी में ऑल इंडिया 309 वीं रैंक पाई

राजस्थान के डूंगरपुर जिले के जैन समाज की एक हाेनहार बेटी ने यूपीएससी में ऑल इंडिया 309 वीं रैंक पाकर हर किसी काे चाैंका दिया है। साबला कस्बे की रहने वाली प्रेक्षा कोठारी की पारिवारिक पृष्ठ भूमि देखें तो कोई भी सदस्य इतनी बड़ी परीक्षा में कभी शामिल होना तो दूर, कॉलेज पढ़ाई तक नहीं की है। पिता सामान्य व्यापारी है। माता गृहिणी है। इन्होंने उच्च स्तर की सफलता पाकर उस मिथक को तोड़ दिया है कि पढ़े लिखे परिवार से ही अधिकारी बनते हैं।

प्रेक्षा कहती है कि परिवार में कोई ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है लेकिन उन्होंने हमेशा मुझे मोरल सपोर्ट किया। इससे मुझे बहुत ताकत मिली और मैंने सफलता, असफलता को एक तरफ करते हुए पूरी मेहनत से तैयारी पर ध्यान दिया। इसी की बदाैलत सफलता मिली है। इसकाे लेकर श्रीफल न्यूज की तरफ सुरभि शाह ने उनसे विस्तृत बातचीत की( प्रस्तुत है उसके अंश…

प्रेक्षा कोठारी कहती है कि 10 वीं में सरकारी स्कूल में पढ़ाई के दाैरान कलेक्टर सर मिड डे मिल की विजिट करने के लिए अाए थे। यह देख कर मुझे काफी अच्छा लगा। साल 2009 में गांव के सरकारी स्कूल से राजस्थान बोर्ड से हिंदी मीडियम से 10वीं में राजस्थान मेरिट में 11वां स्थान मिला था, तभी मैंने कलेक्टर बनने का लक्ष्य बना लिया था। 11वीं में इंग्लिश मिडियम में एडमिशन लिया। उस समय थाेड़ा अटपटा व कठिन लगा, लेकिन इतना ज्यादा भी कठिन नहीं था। उस समय मैंने यह लक्ष्य तो बना लिया था लेकिन इसके लिए कितना पढऩा होता है, किस तरह पढऩा होता है यह नहीं पता था।

2015 में सीए एक्जाम क्लियर किया। काफी मेहनत की थी। सीए की जॉब शुरू की, लेकिन मन नहीं लगा क्योंकि मेरा सपना कलेक्टर बनने का था। मैंने साल 2017 में यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी, 6-7 घंटे सेल्फ स्टडी की। एक्जाम से दाे महीने पहले तक सारा पढ़ाई एक्जाम की तैयारी पर था। डूंगरपुर जिले के किसी युवा के लिए इस रैंक को पाना सपने जैसा है, क्योंकि यहां बड़े शहरों जैसी हाई एजुकेशन स्किल नहीं है। माहौल भी वैसा नहीं हैं।

यह कहती है कि मेरे पिता राजेश कोठारी साबला में अनाज दुकान के व्यापारी है। मां संगीता कोठारी आम गृहिणी है। परिवार का मुख्य व्यवसाय अनाज ही रहा है। प्रेक्षा ने कहा कि पहली प्राथमिकता महिला सशक्तिकरण के साथ गरीब तबके के लोगो को हर सरकारी योजना का भरपूर लाभ देने का प्रयास करना है।

आईएएस उत्तीर्ण करने से पहले प्रेक्षा ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र से एमए किया। तैयारी करते हुए इकोनॉमिक सर्विसेज (आईईएस) में ऑल इंडिया में छठी रेंक हासिल की है। प्रेक्षा अपनी इस सफलता के पीछे स्वर्गीय दादा कांतिलाल कोठारी का आशीर्वाद और माता संगीता देवी व पिता राजेश कोठारी की प्रेरणा मानती है। श्रीफल न्यूज वेबसाइट की तरफ से इनसे राेल माॅडल के बारे में पूछा ताे दादा व परिवार काे ही राेल माॅडल बताया।

जैन समाज के युवा भी अपना लक्ष्य तय कर लें, सफलता जरुर मिलेगी…
प्रेक्षा ने कहा कि जैन समाज के कई संगठन है जैसे जिताे व अन्य संगठन, जाे प्रतियाेगी परीक्षा की तैयारी करवाते हैं। जैन समाज के युवा भी सिविल सर्विसेज में जाना चाहते हैं, इसके तैयारी भी कर रहे हैं। युवा काे लक्ष्य तय कर लेना चाहिए। इससे उनकाे सफलता जरुर मिलेगी। आईएएस परीक्षा उतीर्ण करने के बाद प्रेक्षा कोठारी पहली बार कस्बे में पहुंचने पर समाजजनों सहित ग्रामीणों ने स्वागत किया।

मावजी सर्कल पर आईएएस प्रेक्षा कोठारी का दिगम्बर जैन सहित सर्व समाज के लोगों ने फूल मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया। मावजी सर्कल से स्वागत यात्रा के रूप में प्रेक्षा अम्बिका गरबा चाैक पहुंची। जहा मां अम्बे के दर्शन किए। श्री पदम प्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में सोलह श्रृंगार की पूजन थाली व श्री फल के साथ भगवान की आराधना की। मंदिर में जैन समाज की ओर से प्रेक्षा का राजमल सेठ, महावीर सेठ, गणेशलाल सराफ, दिनेश सराफ, सहित समाज के वरिष्ठजनो ने श्रीफल व शॉल ओढ़ाकर सम्मान एवं अभिनन्दन किया।
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