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होम्बुज में हर्षोल्लास से मनाया जाता है नवरात्र पर्व : – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज

धार्मिक संस्कृति से ओत-प्रोत भारत संसार का ऐसा देश है जहां सभी धर्मों के पर्व और त्यौंहार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सभी धर्मों के त्यौंहार और पर्व यहां बड़े उल्लास, उमंग और श्रद्धा से मनाए जाते हैं। नवरात्रि जैसा त्यौंहार तो सभी को आन्तरिक शक्ति से परिपूर्ण कर देता है। इस लेख में हम जानेंगे जैन धर्मावलम्बियों के प्रमुख तीर्थ होम्बुज देवी मंदिर के बारे में जानेंगे जहां नवरात्रि का पर्व बहुत ही उल्लास के साथ मनाया जाता है और यह प्रमाणित करता है कि जैन धर्म में नवरात्र कितना महत्वपूर्ण अनुष्ठान व पर्व है –

अतिशयकारी होम्बुज देवी

देश-विदेश से भक्तगण माता होम्बुज पद्मावती के दर्शनों के लिए आते हैं। होम्बुज पद्मावती कर्नाटक के मनोरम तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर चमत्कारी प्रभावों से आज भक्तों में बड़ा ही प्रसिद्ध हो गया है। सातवीं सदी में उत्तर मथुरा के उग्रवंशी जिनदत्त राय ने यहां अपने राज्य की स्थापना की थी। यह राजा जैन धर्मावलम्बियों की यक्षिणी पदमावती देवी के परम भक्त थे। यहां पर कुल दस मंदिर हैं, परन्तु मुख्य मंदिर अतिशयकारी पद्मावती जैन मंदिर है जो भगवान पार्शवनाथ मंदिर के साथ स्थित है।

मनोरथ होते हैं यहां पूर्ण

यहां बड़ी संख्या में भक्त आते हैं और देवी के वर प्रसाद से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। कहा जाता है कि यहां से आज तक कोई भक्त खाली हाथ नहीं गया और नवरात्रों में तो यहां देवी के दर्शनों के लिए भक्त उमड़ पड़ते हैं। माता की मू्र्ति जितनी मनोहारी है उतनी ही उनकी ख्याति है। यहां देवी पदमावती अपने चैतन्य और जीवन्त रूप में उपस्थित हैं।

राजवंश को मिली श्रेष्ठ महिला शासक

माता की भक्ति और शक्ति का ही प्रताप है कि इस राजवंश में श्रेष्ठ महिला शासकों चाकल देवी, कालल देवी और शासन देवी आदि जैसी कई शक्तिशाली महिला शासक मिली जिन्होंने शासन की बागडोर संभाली। होम्बुज की गुरुपरंपरा कुन्दकुन्दानवयांतर्गत नंदी संघ से सम्बन्धित है। इसके भट्टारक स्वामी देवेन्द्र कीर्ति के नाम से जाने जाते हैं जो समस्त क्षेत्र की व्यवस्था का प्रबन्धन करवाते हैं तथा साथ ही अनुष्ठान, धार्मिक कार्य और समारोह उन्हीं के सानिध्य में आयोजित होते हैं।

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