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जल, जंगल, जमीन हमारी अमूल्य धरोहर, इनको बचाना हमारा दायित्व

बकस्वाहा का जंगल बुंदेलखंड के फेफड़े हैं

ललितपुर । वर्चुअल राष्ट्रीय बेबीनार में जस्टिस, समाजसेवी, पर्यावरणविद, आईएएस, पत्रकार, एडवोकेट और पर्यावरण प्रेमियों ने किया संवाद

ललितपुर। पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण और हमारा दायित्व तथा बकस्वाहा का जंगल एवं हमारे दायित्व विषय पर प्रभावना जन कल्याण परिषद रजि एवं तहसील प्रेस क्लब (रजि.) के संयुक्त तत्वावधान में एक राष्ट्रीय बेबीनार का आयोजन पर्यावरणप्रेमी, वरिष्ठ समाजसेवी कपिल मलैया , सागर अध्यक्ष विचार संस्था सागर की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें देश के प्रमुख पर्यावरणविद, राजनेता, समाजसेवी, जस्टिस, एडवोकेट, वरिष्ठ पत्रकार एवं पर्यावरण से जुड़ी संस्थाओं के प्रमुख लोगोंने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण पर विचार-विमर्श किया  साथ ही बुंदेलखंड के बकस्वाहा में जंगल के लाखों  वृक्षों को बचाने के लिए शंखनाद भी किया।  

वर्चुअल आयोजित बेबीनार में सर्वप्रथम प्रद्दुम्न शास्त्री जयपुर ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। बेबीनार के निर्देशक वरिष्ठ समाजसेवी राजेश रागी बकस्वाहा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए बकस्वाहा के जंगल काटने के मुद्दे पर प्रकाश डाला और सभी से पर्यावरण बचाने की मुहिम में शामिल होने की अपील की। बेबीनार के संयोजक डॉ. सुनील संचय ललितपुर ने वेविनार की रूपरेखा पर प्रकाश डाला और कहा कि अब जब मशीनों से ऑक्सीजन स्तर जांचने की जरूरत पड़ रही है तो जरूरी है कि हम गंभीर हो जाएं और अपने हिस्से की ऑक्सीजन की व्यवस्था सिलेंडर से नहीं बल्कि कुदरत से करें । पेड़ लगाएं, उनकी देखभाल करें।

कार्यक्रम का सफल संचालन विदुषी डॉ. ममता जैन पुणे महाराष्ट्र ने किया तथा आभार परिषद के अध्यक्ष सुनील शास्त्री सोजना व संयोजक मनीष विद्यार्थी शाहगढ़ ने व्यक्त किया।

मुख्य अतिथि भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री   प्रदीप जैन आदित्य ने इस दौरान कहा कि जल, जंगल, जमीन हमारे जीवन की बुनियाद हैं। प्रकृति हमें बचपन से हमें जीवन मूल्य सिखाती है। बक्सवाहा के जंगलों को बचाने के लिए इसे सामाजिक , राजनैतिक व संवैधानिक  स्तरों पर सार्थक रूप से बचाने की पहल करते हुए कहा कि आज इस विषम परिस्थितियों ने हमे सिखा दिया कि पर्यावरण के आगे पैसे का कोई मूल्य नहीं अगर प्राणवायु ही नही होगी तो हमारा जीवन खतरे में पड़ जायेगा। बेतवा केन लिंक परियोजना के अंतर्गत पन्ना रिजर्व के 18 लाख वृक्ष काटने की बात की जा रही है। हम इसका पुरजोर विरोध करेंगे। 

कृष्णा विश्वविद्यालय के उपकुलसचिव, पर्यावरणविद प्रो. अश्वनी कुमार दुबे (ई एस डब्ल्यूसोसायटी खजुराहो) ने अपने व्याख्यान में स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र पर विशेष प्रकाश डाला। वायुमंडल व व्रह्माण्ड की रचना व उसके संचालन में प्रत्येक जीव जंतुओं व पेड़ पौधों के महत्त्व के वारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि हम विस्तारवादी भौतिक बदलाव में प्रकृति का अत्याधिक दोहन कर चुके हैं और इसी के कारण हम आज इस महामारी का विकराल रूप देख रहे हैं, बक्सवाहा के जंगलो से करीब 2लाख  से अधिक पेड़ो के काटे जाने के इस एरिया की जल वायु पर अत्याधिक  विपरीत प्रभाव पड़ेगा। बकस्वाहा के जंगल के ऐतिहासिक और भौगोलिक तथ्यों पर जानकारी दी और कहा कि सवाल पौधों के काटे जाने का नहीं पूरे ईको सिस्टम का है। यदि पेड़ काटे जाते हैं तो ओजोन परत को हानि पहुँच सकती है। टमाटर, सेम जैसी सब्जियों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि इस जंगल में 72 प्रकार की प्रजातियों के महत्वपूर्ण जीव जंतु हैं जिसमें राष्ट्रीय पक्षी मोर भी है। यहाँ पाए जाने वाले दो मुंह के साप की कीमत  ढाई से पांच करोड़ रुपए है। हीरे की वजह से पूरे ईको सिस्टम को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट को स्वयं संज्ञान में ऐसे मामलों को लेना चाहिए। बकस्वाहा जंगल काटने के मुद्दे पर जुलाई के प्रथम सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होना है।

न्यायमूर्ति विमला जैन भोपाल ने कहा कि आज के कठिन दौर में सबसे अधिक उपयोगिता पर्यावरण की है। उन्होंने नैनागिर क्षेत्र के पर्यावरण विकास के बारे में जैन क्षेत्रो में वृक्षो के लगाए जाने के उनके संकल्प की विस्तृत रूपरेखा रखी।

डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर  के प्रो. कृष्णा राव सागर ने मानव स्वास्थ्य में पर्यावरण का योगदान पर व्याख्यान दिया। उन्होंने का प्रकृति हमारी दाता है। हम लोग प्रकृति पर निर्भर हैं प्रकृति हम पर निर्भर नहीं है। धरती का भूजल स्तर दिनोंदिन नीचे गिर रहा है इसका प्रमुख कारण है खेती में यूरिया आदि का प्रमुखता से उपयोग। उन्होंने कहा कि बकस्वाहा का जंगल बुंदेलखंड के फेफड़े हैं। इसे बचाना सभी का दायित्व है।रिटायर्ड आईएएस श्री सुरेश जैन भोपाल ने कहा कि हम छोटे- छोटे नियम लेकर भी पर्यावरण को स्वच्छ बना सकते हैं  जैसे कि हम अपने द्वारा उगाई गयी धनिया और मिर्ची ही खायेंगे, अपने आसपास वृक्षों को जरूर लगाएंगे, अनावश्यक रूप से पत्तियां व डालिया नहीं तोड़ेगे आदि।

विदुषी डॉ नीलम जैन पुणे ने पर्यावरण के प्रति हमें अपनी संवेदनशीलता दिखानी होगी।

महर्षि विद्या मंदिर प्राचार्य व पर्यावरणप्रेमी सी के शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज वक्त आ गया है कि हम सब छोटे छोटे संकल्प लें कि हम अपने जन्मदिन पर कम से कम दो पेड़ जरूर लगाएंगे व उनको बड़े होने तक संरक्षित भी करेंगे,अगर कोई पेड़ सूख जाए तो उसके स्थान पर कम से कम दो पेड़ो को हम अवश्य लगाएं। छतरपुर के जानेमाने  वरिष्ठ पत्रकार आशीष खरे ने बताया की ये हमारी लड़ाई की जीत का नतीजा ही है कि 2002 से जले आ रहे इस प्रकरण के वाबजूद भी हम आज तक बक्सवाहा के जंगलों को बचाये रखने में सफल रहे है। हमे आज इस लड़ाई को वड़े ही शसक्त तरीके से शासन व प्रशासन के समक्ष रखना होगा।

अध्यक्ष मानव ऑर्गनाइजेशन ललितपुर के अध्यक्ष एड. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने गौरैया, गिद्ध संरक्षण के उनकी द्वारा चलाये जा रहे अभियान के बारे में जानकारी दी साथ ही ललितपुर में बकस्वाहा जंगल बचाने के लिए उनके द्वारा चलाए जा रहे पोस्टकार्ड अभियान से अवगत कराया।

एड. रामेश्वर सोनी रोशन  कवि बक्सवाहा  ने अपनी कविता में कहा कि जल जमीन जंगल जीवनहित, जनजागरण जरूरी है। पेड़ लगावो पेड़ बचाओ पर्यावरण जरूरी है।

इस विशिष्ट बेविनार में  मुख्य अतिथिगणों में अजय टंडन,विधायक दमोह ,विशिष्ट अतिथि

 प्रदीप जैन रायपुर,सदस्य-भारतीय प्रेस परिषद,भारत सरकार, राजकुमार जैन

प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय सतना, वरिष्ठ समाजसेवी सुनील घुवारा टीकमगढ़, अंकित मिश्रा,युवा गांधियन स्कॉलर एवं पर्यावरणविद, ट्विटर अभियान से जुड़े ललितांक जैन भोपाल आदि ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत में वरिष्ठ समाजसेवी उदयभान जैन जयपुर सपरिवार ने दीप प्रज्वलित किया।

बेबीनार को सफल बनाने में समन्वयक पंकज जैन छतरपुर, डॉ.प्रगति जैन इंदौर, पत्रकार प्रकाश अदावन, शाहगढ़ ,राजेंद्र महावीर सनावद, चेतन जैन बंडा आदि का योगदान रहा।

बेविनार में महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मणीन्द्र जैन दिल्ली, सुमतिप्रकाश जैन सागर, अनीता दीदी, एडवोकेट उर्मिला चौहान, डॉ राजीव निरंजन ललितपुर, डॉ यतीश जैन जबलपुर, डॉ प्रवीण जैन, विनोद जैन,अकलेश अजमेर, डॉ ज्योतिबाबू जैन उदयपुर, रत्नेश रागी बकस्वाहा, मनीष तिजारा, मनोज बगरोही, अर्पित जैन, अर्चना आदि प्रमुख रूप से सम्मिलित रहे।

*#savebuxwahaforest ट्विटर अभियान में हजारों ने किया ट्वीट, पर्यावरण बचाने के लिए जलाए दीपक*

 बुंदेलखंड में छतरपुर जिले में एक छोटा सा कस्बा है बक्स्वाहा, जहां देश का सबसे बड़ा हीरा भंडार पाया गया है। बकस्वाहा के जंगल की जमीन में 3.42 करोड़ कैरेट हीरे दबे होने का अनुमान है, और इन्हें निकालने के लिए 382.131 हेक्टेयर का जंगल खत्म किया जाएगा। वन विभाग ने जंगल के पेड़ों की गिनती की है, जो 2,15,875 है। इन सभी पेड़ों को काटा जाएगा। इनमें लगभग 40 हजार पेड़ सागौन के हैं, इसके अलावा केम, पीपल, तेंदू, जामुन, बहेड़ा, अर्जुन जैसे औषधीय पेड़ भी हैं। अगर इतनी तादात में एक साथ वृक्षों को काटा जायेगा तो  पूरे बुंदेलखंड पर इसका क्या दुष्प्रभाव पड़ेगा इसकी कल्पना नही की जा सकती है। 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दोपहर 2 बजे से युवाओं ने #savebuxwahaforest को ट्विटर पर ट्रेंड कराने का बीड़ा उठाया और हज़ारों की संख्या में लोगों ने इस मुहिम में भाग लिया  शाम 4 बजे तक पचास हजार लोग इस मुहिम में शामिल होकर ट्वीट कर चुके थे। साथ ही “एक दीया प्रकृति के नाम” नामक अभियान के माध्यम से पर्यावरण दिवस पर समस्त देशवासियों से एक दीया जलाने का आव्हान पर बड़ी संख्या में लोगों ने दीप प्रज्वलित कर अपनी भूमिका निभाई। यह इस बात का प्रतीक होगा कि हम सभी पर्यावरण और प्रकृति के लिए साथ खड़े हैं।

डॉ. सुनील जैन संचय, ललितपुर

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